अपने शौक को बनाया सेवा मार्ग, 3 साल से लोगों को खिला रहे हैं भोजन 

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एनटी न्यूज डेस्क। 

लखनऊ। राजधानी लखनऊ की सड़कों पर अमूमन ज्येष्ठ के हर मंगलवार को भंडारे जरूर दिख जाते हैं, वहीं गोमतीनगर के विभूति खंड में पंजाबी ढाबे पर प्रत्येक गुरुवार को भण्डारे का आयोजन किया जाता है। यह सिलसिला लगभग 3 साल से अनवरत चल रहा है। जहां सैकड़ो लोग भोजन करते हैं। इसी क्रम में आज पंजाबी ढाबे की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों लोगों ने भोजन किया।

 

अमित शर्मा बताते हैं कि भगवान ने हमे इस लायक बनाया है कि हम ऐसा कर सकें, भोजन कराकर हमे बड़ा सकूंन मिलता। भण्डारे में भोजन कर रही अन्नू ने से जब पूछा की तुम कबसे इस भंडारे में आ रही हो , तो अन्नू ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण करते हुए कहा की हम लोग कई सालों से हर गुरुवार को इस भंडारे में आते हैं। अतुल बताते हैं इस भंडारे का भोजन हमारा पूरा परिवार मिलकर बनाता है। अतुल शर्मा पंजाबी ढाबा नाम से एक रेस्टोरेंट चलाते हैं उससे होनी वाली आमदनी से भंडारे का आयोजन करते हैं।

अमित ने अपने शौक को सेवाभाव से जोड़ा

दूसरों के प्रति निःस्वार्थ सेवा का भाव रखने वाले पेपरमिल कॉलोनी एफ-चार-बी निवासी अमित शर्मा इस ढाबे के मालिक हैं। जिन्होंने अपने जीवन का ध्येय धन कमाने से ज्यादा  दूसरों की सेवा में लगा रखा है। अमित बताते हैं कि उन्हें खाना बनाने का शौक बचपन से था। इसी कारण तीन साल पहले इन्होंने
गोमतीनगर के विभूतिखंड में होटल हयात के सामने  पंजाबी ढाबा नाम से रेस्तरां खोला। साईं बाबा के भक्त होने के कारण उन्होंने शुरुआत से ही अपने ढाबे के बाहर प्रत्येक गुरुवार को भंडारे का आयोजन शुरू किया।

खुद  तैयार करते भंडारे की भोजन सामग्री

भंडारे में राजमा और चावल का वितरण दोपहर एक बजे से तीन बजे तक किया जाता है।  इस भंडारे के बारे में आसपास के लोग खूब जानते हैं। उनको गुरुवार आने का इंतजार रहता है। आसपास काम करने वाले मजदूर, मिस्त्री ही नहीं । आलीशन ऑफिस और राहगीर रुक-रुक कर यहां का प्रसाद चखे बिना आगे नहीं जाते हैं। इससे पहले  भंडारे की तैयारी के लिए अमित अपने परिवार सहित सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक भंडारे का भोजन खुद तैयार करते हैं।

इस रेस्त्रां में रखा है दानपात्र

अमित बताते हैं कि रेस्त्रां में आने वाले  ग्राहकों को बिल तो देते हैं। लेकिन कभी किसी से तकादा नहीं करते हैं। ग्राहक पूरा पैसा दे या फिर बिना पैसे दिए ही चला जाये किसी को टोकते नहीं हैं। रेस्त्रां में रखे दानपात्र में ही वह पैसा डलवाते हैं।  उनका कहना है कि  इसी दानपात्र की धनराशि से  अपने रेस्त्रां के खर्चे, कर्मचारियों का वेतन और बिजली खर्च आदि निकालते हैं।