आप सिविल सेवा की तैयारी कर रहें हैं तो चारु द्विवेदी की प्रेरणादायक स्टोरी जरूर पढ़ें

जीवन में कुछ ऐसे समय आते हैं जहाँ व्यक्ति टूट जाता है, जीवन में अँधेरा छा जाता है लेकिन मुश्किल दौर में हमारा धैर्य और इच्छाशक्ति एक मजबूत स्तम्भ होते हैं जिनके दम पर बड़ी से बड़ी बाधाएं पार हो जाती हैं. हम एक ऐसे प्रतियोगी छात्र से आपको रूबरू करा रहें हैं जिसने कठिन समय को अपना हौसला माना और सफलता के आसमान में एक शानदार छलांग लगाई।

न्यूज़ टैंक्स- बबिता रमवापुरी

छोटा भाई चाहता था की मैं अधिकारी बनू, मैंने भाई से प्रेरणा लेकर काज मुकाम को हासिल किया लेकिन अफ़सोस नियति को कुछ और ही मंजूर था आज वह भाई इस दुनिया में नहीं है. यह कहते हुए चारु की आँखें भर आती हैं और भावुक हो जाती हैं. हम बात बात रहे हैं बुंदेलखंड की होनहार बेटी डॉ. चारू द्विवेदी की. उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में 12वीं रैंक हासिल करने वाली चारु दिवेदी को अधिकारी बनने की प्रेरणा अपने छोटे भाई से मिली। “न्यूज़ टैंक्स” से बात करते हुए उन्होंने बताया की मेरी पृष्ठभूमि एक राजनैतिक परिवार से है, पिता रमेशचंद्र द्विवेदी सांसद और विधायक रहे.लेकिन फिर भी भाई की इच्छा थी मैं अधिकारी बनू. पेश हैं डॉ चारु से बातचीत के कुछ अंश

माता-पिता के साथ चारु दिवेदी

 

प्रेरणा कैसे मिली सिविल सेवा में जाने की

जैसा की मैंने पहले बताया की मेरी कोई मंशा नहीं थी सिविल सेवा में जाने की, लेकिन भाई ने प्रेरणा दी और उसका कहना था की दीदी आप एसडीएम या डिप्टी एसपी बनो. भाई तो प्यारा होता ही है लेकिन छोटा भाई कुछ ज्यादा ही प्यारा होता है. फिर मैंने ठान लिया की अब परीक्षा पास करनी है. असमय भाई की मौत ने तोड़ दिया लेकिन मुझे लगा यह समय हिम्मत हारने का नहीं है, कुछ करने का है. मैंने साहस से काम लिया और परिणाम आज सामने है. मुझे लगता है मेरे अनुज को यह सच्ची श्रद्धांजलि है.

स्व: मोहित दिवेदी

 

समय का प्रबंधन जरुरी है

चारु दिवेदी कहती हैं सिविल सेवा कोई आसान परीक्षा नहीं है. लेकिन अगर हम अगर सही ढंग से समय से ईमानदारी के साथ आठ से दस घंटे पढ़ें तो यह परीक्षा बहुत सरल हो जाती है. जब हम एकाग्रचित होकर पढाई नहीं करते हैं तो समस्या हो जाती है. हम पढाई के समय अपने पास कागज और कलम जरूर रखें जहाँ लगे की यह टॉपिक कठिन है आप उसको नोट कर लें और फिर पढ़ें, तैयारी के लिए नोट्स बहुत जरुरी है.

भाई रोहित और माता के साथ चारु

धैर्य बहुत जरुरी है

प्रतियोगी परीक्षा देने वाले छात्रों को सलाह देते हुए चारु कहती हैं जीवन में धैर्य बहुत जरुरी है, बिना इसके कोई भी परीक्षा पास करना असम्भव है. हमें अपने अंतिम समय तक अपने धैर्य को मेहनत और ईमानदारी के साथ बनाये रखना जरुरी है. सफलता जरूर मिलेगी।

वैवाहिक जीवन के बाद भी पढाई कठिन नहीं है
चारु बताती हैं की, अक्सर कुछ लोग गलतफहमी पाल लेते हैं, खासकर महिलाओं के लिए की शादी के बाद जिम्मेदारी बढ़ जाती है ऐसे में प्रतियोगी परीक्षा देना सरल नहीं होता है. जबकि यह गलत है.

सासू माँ के साथ चारु दिवेदी

महिला-पुरुष कोई भी अगर उसकी इच्छाशक्ति मजबूत है तो कोई राह कठिन नहीं है. चारु द्विवेदी कहती हैं जब मैंने प्रतियोगी परीक्षा देने की बात की तो सबसे पहले मेरी सासू माँ ने मेरा साथ दिया।

पति देवेंद्र तिवारी के साथ चारु

मेरे ससुराल ने मेरा बहुत सपोट किया। पति का बिजनेस है वह उसे सम्हालते हैं. ससुराल में सभी का मेरे प्रति सपोट रहा.

हमें अपने वसूलों से समझौता नहीं करना चाहिए
चारु बताती हैं की प्रशासनिक व्यवस्था में कई समस्याएं सामने आती हैं लेकिन हमे अपने वसूलों से समझौता नहीं करना चाहिए। सही को सही और गलत को गलत कहने की क्षमता होनी चाहिए।

सोशल मीडिया भी आपके लिए लाभप्रद साबित हो सकता है
चारु द्विवेदी की मानें तो सोशल मीडिया का अगर सही प्रयोग किया जाये तो यह काफी कारगर साबित हो सकता है. हमें कभी-कभी ऐसे ग्रुप मिल जाते हैं जिसमे तमाम जानकारियां होती हैं. फेसबुक पर तैयारी करने वाले तमाम प्रतियोगी छात्रों का समूह है. जिससे हमे काफी मदद मिल सकती है. लेकिन चारु सजग करते हुए यह भी कहती हैं की हमें इसका आदि नहीं होना चाहिए। इसी पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए।

शिक्षा
एमएससी – बायो टेक्नालॉजी
पीएचडी- नैनो टेक्नालॉजी
हाईस्कूल से लेकर बीएससी तक की पढ़ाई प्रयागराज (तब इलाहाबाद)