रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर जैव कीटनाशकों का इस्तेमाल हो: श्रीराम चौहान उद्यान मंत्री

न्यूज टैंक्स/ झांसी

झांसी। देश के विभिन्न कृषि अनुसंधान संस्थानों की प्रयोगशालाओं में तैयार बायो पेस्टिसाइड्स के प्रयोग से सब्जियों तथा फसलो को विषैले रसायनों के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। अतः आवश्यकता इस बात की है कि हम वर्तमान में रासायनिक कीटनाशकों की जगह जैव कीटनाशकों का इस्तेमाल करें यह विचार आज राज्य के उद्यान मंत्री राम चैहान ने व्यक्त किए।

उद्योग मंत्री आज बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सब्जी रोग प्रबंधन की नई दिशाएं विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त कर रहे थें उन्होंने कहा कि कि सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है परंतु हमारी उत्पादकता एवं गुणवत्ता मे काफी अन्तर है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश एक प्रमुख सब्जी उत्पादक राज्य है जहां लगभग 1.26 मिलियन हेक्टेयर में सब्जियों की खेती की जाती है परंतु अन्य देशों की अपेक्षा हमारे देश में प्रति हेक्टेयर भूमि में सब्जियों का उत्पादन काफी कम होता है।

इसका कारण उच्च उत्पादकता वाले प्रजातियों का अभाव, रोग प्रतिरोधी प्रजातियों की विविधता में कमी, उचित रोग नाशक एवं रोगाणु नाशक यंत्रों तथा रसायनो की कमी, रोग कारकों को मारने वाले सूक्ष्म जैविकीय कारकों की कमी और किसानो के द्वारा मौसम के अनुरूप रोग कारकों के समुचित उपयोग न कर पाने के कारण होने वाले संक्रमण से सब्जियों के उत्पादन में किसानो को नुकसान उठाना पड़ता है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के पूर्व कुलपति प्रो.कल्लू गौतम ने वेबिनार का बीज वक्तव्य देते हुए बताया कि सब्जियों में रोगों से बचाव हेतु विभिन्न प्रयोग किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी विशेष मौसम में यदि रोग की अधिकता होती है तो किसान बुवाई की तिथियों में परिवत्रन कर सब्जियों में रोगों के संक्रमणसे बच सकेते हैं। इसके अतिरिक्त हमें नई रोग प्रतिरोधक प्रजातियों को भी तैयार करना होगा तथा किसान द्वारा सब्जी उत्पादन में जैव नाशी का अधिकतम उपयोग किया जाना सुनिश्चित किया जाय।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.जे.वी.वैशंपायन ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि वर्तमान कोरोना काल के परिदृश्य में सब्जियों का अधिकतम प्रयोग किया जा रहा है, अब यह वनस्पतिशास्त्रियों तथा कृषि वैज्ञानिकों का दायित्व है कि वे ऐसी सब्जियों के उत्पादन एवं प्रयोग को बढ़ावा दे जो मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सक। कुलपति ने आयेाजकों को समीचीन विषय के चयन हेतु बधाई हेतु हुए कहा कि वर्तमान समय में वेबिनार की विषय के कारण वेबीनार की महत्ता स्वयं ही बढ़ जाती है।

आज के कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में अधिष्ठाता विज्ञान संकाय प्रो. एम एम सिंह ने आमंत्रित अतिथियों तथा वक्ताओं का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की उन्होंने बताया उन्होंने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का संचालन डॉ.राजेश कुमार पाण्डेय ने किया जबकि आमंत्रित अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डॉ.आर.के.वर्मा ने किया।

आज के उद्घाटन समारोह के पश्चात हुए तकनीकी सत्रों में शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर कृषि एग्रीकल्चर के निदेशक प्रो.हरी एस गौड़, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के पूर्व कुलपति डॉ एस एम पॉल खुराना, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री के संकायाध्यक्ष डॉ ए.के.पाण्डेय, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चर रिसर्च, बैंगलोर के डिवीजन ऑफ क्रॉप प्रोटेक्शन के मुख्य वैज्ञानिक डॉ.एम. एस. राव, इंस्टीट्यूट ऑफ पेस्टिसाइड्स फॉर्मूलेशन टेक्नोलॉजी, गुरुग्राम के निदेशक डॉ जितेन्द्र कुमार ने अपने अपने वक्तव्यो के द्वारा वेबीनार में उपस्थित श्रोताओं का ज्ञाप वध्रन किया।

इस अवसर पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता अकादमिक प्रो एस पी सिंह, डॉ गजाला रिजवी, डा. पूनम मेहरोत्रा, डा.गौरव निगम, डॉ आर डी कुरेशिया, डॉ अमित तिवारी, जयनारायण तिवारी, मोहित गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक शिक्षिकाएं तथा छात्र उपस्थित रहे।

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