बिहार चुनाव- लालटेन में न तेज है और न प्रताप है, सिर्फ नाम है : संबित पात्रा

न्यूज़ टैंक्स | लखनऊ

बिहार विधानसभा चुनाव लेकर सभी पार्टियों ने चुनावी समर में उतरने से पहले बयानबाजी को तेज कर दिया है। भाजपा अब लगातार हमलावर मोड़ में आ गई है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने आज यहां राजद पर जमकर निशाना साधा। राजधानी पटना में संबित पात्रा ने तेजस्वी और तेजप्रताप पर तंज कसते हुए कहा कि कहा कि लालटेन में न तेज है और न प्रताप है, सिर्फ नाम है। भाजपा ने तेजप्रताप के उस लोटा पानी वाले बयान को हथियार बना लिया है। संबित पात्रा ने आज लालू परिवार और कांग्रेस पर एक साथ वार किया।

उन्होंने कहा कि बिहार में भाई- भाई की लड़ाई और दिल्ली में भाई- बहन की लड़ाई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एक तरफ निर्णय लेने कि क्षमता है दूसरी तरफ परिवारवाद है। पात्रा ने कहा कि बिहार में विधानसभा के चुनाव है। इसलिए 70 जगहों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिहार में एक तरफ नीतीश कुमार हैं, तो दूसरी तरफ कोई नहीं है। विकास बनाम जेल की लडाई है 2020 का चुनाव. एक तरफ विकास पुरुष नरेंद्र मोदी है। दूसरी तरफ विकास बाबू नीतीश कुमार. दूसरी तरफ का महत्वपूर्ण नेता जेल में है अपनी करतूतों की वजह से राजद और कांग्रेस में राजकुमार और राजकुमारियों की लडाई चल रही है। बिहार की 12 करोड़ जनता निर्णय लेगी एक तरफ निर्णय लेने की क्षमता खड़ी है। इसके साथ ही संबित पात्रा ने डा. रघुवंश प्रसाद सिंह के निधन के लिए राजद दो दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि एक लोटा पानी से राजद का तर्पण होगा। दरअसल, रघुवंश प्रसाद सिंह की नाराजगी के बाद तेजप्रताप यादव ने कहा था राजद समंदर है और लोटा पानी कम भी हो जाएगा तो फर्क नहीं पडेगा। ऐसे में भाजपा ने तेजप्रताप के इस बयान को नया हथियार बना लिया है।

पात्रा ने कहा कि रघुवंश प्रसाद सिंह के निधन पर दुख हुआ, उनका अंतिम समय वेदना से भरा हुआ। तेज प्रताप यादव से कहना चाहता हूं आपने जो एक लोटा पानी निकाला है उसी से राजद का राजनीतिक पर तर्पण होगा. बिहार में बिजली हमेशा रहती है। लालटेन की जरूरत नहीं है। बिहार और ऊर्जा मय है। उन्होंने कहा कि जब चीन के साथ विवाद चल रहा था और हमारे 20 जवान शहीद हुए थे। उनकी चिताएं ठंठी नहीं पडीं तो उस दौरान राहुल गांधी राजनीति कर रहे थे। देश को चीन के आगे सरेंडर बता रहे थे। क्या यह राजनीति करने का समय था? लेकिन हिन्दुस्तान की जनता किसी भी कीमत पर बिहार में उनको वोट देने वाली नहीं है। उनको बिहार की चुनाव में सबक सिखाने वाली है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी के बयान पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के लिए पटना पहुंचे संबित पात्रा ने सुशील मोदी के बयान पर चुप्पी साध ली।

संबित पात्रा से जब पलायन वाले सुशील मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने यह कहते हुए कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया कि उन्होंने सुशील मोदी का बयान नहीं देखा है। जिस बयान को लेकर बिहार में सियासी पारा सबसे ज्यादा गर्म है लगातार भाजपा की फजीहत हो रही है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से लेकर विपक्ष के तमाम नेताओं ने इस बयान को मुद्दा बनाया हुआ है। उस बयान को पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने नहीं सुना।

वहीं, राज्य के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने कहा है कि विपक्ष के युवराजों को मैन ऑफ निगेटिविटी की उपाधि मिलनी चाहिए। क्योंकि, विपक्षी नेताओं की सकारात्मक सोंच पूरी तरह खत्म हो गई है। मंत्री ने विपक्षी दलों की कथनी और करनी पर प्रहार करते हुए कहा कि विपक्षी दलों के नेता नकारात्मक ऊर्जा से ग्रसित हैं। यह उनके उल-जुलूल बयानों से साबित हो चुका है। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष के युवराजों को ‘ मैन ऑफ निगेटिविटी’ की उपाधि मिलनी ही चाहिए. इन लोगों ने आज तक कोई सकारात्मक बात नहीं की। चाहे देश की सुरक्षा की बात हो, या फिर कोरोना संकट से लडने की। इनकी निगेटिविटी से तो देश का कुछ नहीं बिगडेगा।

इसबीच, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस की वर्चुअल रैली सिर्फ सदाकत आश्रम तक ही सीमित है। उसका बिहार क्रांति महासम्मेलन लोगों को रास नहीं आ रहा है। बिहार में इससे जुडने वालों की संख्या नगण्य है। बिहार के लोगों का यह मानना है कि कांग्रेस राजद की पिछलग्गू बन कर रह गई है। कांग्रेस महागठबंधन का प्रमुख अंग सिर्फ कहने के लिए है। सच तो यह है कि कांग्रेस बिहार में अपना अस्तित्व बचाने को लेकर राजद के आगे नतमस्तक है। सीट शेयरिंग के मामले में राजद प्रमुख जेल से ही इस राष्ट्रीय पार्टी को कठपुतली की तरह नचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बिहार की जनता ने तीन दशक पूर्व ही बिहार की सत्ता से इस कदर बेदखल किया कि अब भविष्य में भी उसके हाथों में सत्ता आने की संभावना नहीं है। कांग्रेस की अब कोई क्रांति बिहार में रंग लाने वाली नहीं है।