विज्ञान एवं धर्म की पूरी कोशिस यही है की व्यक्ति का जीवन स्वस्थ, सुखी व प्रसन्न बने : योगी आनंद जी

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एनटी न्यूज डेस्क

योगी आनंद जी। एक प्रमुख हिन्दू संत हैं।गीता के मर्मग योगी आनंद जी देश ही नही विदेश में भी अध्यात्म एवं वेद वेदांग की शिक्षा देते हैं। योगी जी एक कार्यक्रम के सिलसिले में उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले में थे। जहां उनको सुनने के लिये सैकड़ों की संख्या में अनुयायी जुटे हुए। जिले के पुलिस अधीक्षक अरविंद चतुर्वेदी भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बने। पढ़ें क्या लिखा है योगी आनंद जी ने

। मायया अपहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिता: ।।

मित्रों !!! परमार्थ एवं परहित का पूरी पराकाष्ठा से पूर्णत : परिहास करने वाले आज के इस स्वार्थ-प्रधान युग में केवल अर्थ व काम सुख को ही एक मात्र जीवन की धन्यता तथा सर्वोच्च सफलता मान कर प्राय: लोग अघासुर होते जा रहे हैं ।

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि, ईश्वरीय माया के द्वारा ही लगभग अधिकांशतः सभी का ज्ञान, विवेक हरा जा चुका है । जिस किसी प्रकार से भी ऐश्वर्य एवं वैभव को पाने व दिखाने की होड़ लगी हुई है । अब आज तो धर्म जगत भी इस से मुक्त नहीं रह गया है । जो कभी “साधु चरित सुभ चरित कपासू” हुआ करते थे, आज महात्माओं का परिचय भी अब उनके सच्चारित्र्य, ज्ञान, वैराग्य, कठोर तप एवं धर्माचरण से नहीं दिया जाता है बल्कि पूछने पर लोग कहते हैं अरे,,,,,,ये महात्मा जी तो करोडों अरबों में जा रहे हैं

धरी न काहू धीर सबके मन मनसीज हरे ।
जेहि राखे रघुबीर सो उबरहिं तेहीं काल मँह ।।

विज्ञान एवं धर्म की पूरी कोशिस यही है की व्यक्ति का जीवन स्वस्थ, सुखी व प्रसन्न बने परन्तु परिणाम तो सर्वथा इसके विपरित ही दिखाई पड़ रहा है ।

आखिर क्यों। ???

आज के सुविधा भोगी समाज में इन्द्रियों का गुलाम हो कर जीने वाला प्राय: हर एक व्यक्ति अनेक प्रकार के रोगों से ग्रसित हो चुका है, क्योंकि आज का पूरा जीवन बहुविध तनावों से भरा हुआ है, क्योंकि व्यक्ति अज्ञान वश स्वयं को ही मुख्य कर्ता मान कर विशुद्ध मिथ्या अहंकार से भरता चला जा रहा है, क्योंकि उस अहंकारी व्यक्ति को समाज में सबसे अलग, अपने आपको सर्व-श्रेष्ठ दिखना है । होना नहीं है । जिसके फल स्वरुप आज का व्यक्ति आधुनिक शिक्षा सम्पन्न, अच्छे से अच्छे उँचे पदों पर आसीन होने के उपरान्त भी विविध प्रकार के भय, लोभ, चिन्ता, विषाद से शोक सन्तप्त हो कर आत्म हत्या का शिकार हो रहा है अथवा तो जीवन को सुखी करने के व्यामोह में भ्रष्टाचार का तरह तरह के आडम्बर का आश्रय लेकर दिग्भ्रमित होता जा रहा है ।

सीर्फ एक ही कदम उठा था, गलत राहे शौक में
मंजिल तमाम उम्र मुझे ढूँढती रही ।।

प्रतिवर्ष उत्तरोत्तर अभिवृद्धि को प्राप्त इस महामारी से समाज का कोई भी क्षेत्र, कोई भी सरकारी गैर सरकारी अर्ध सरकारी विभाग भी अब अछुता नहीं रह गया है ।

लेकिन इसका उपाय क्या है । ??

इसका एक मात्र उपाय, समाधान है गीता के पवित्रतम ज्ञान का आश्रय व जीवन के प्रत्येक व्यवहार की दिशा में राष्ट्र कल्याण की भावना से निष्काम भाव पूर्वक शुभ मंगलमय आचरण । प्रत्येक जीवन का उद्धार, व्यक्ति का सुधार, हृदय परिवर्तन, गीता के ईश्वरीय ज्ञान से ही सम्भव है । अगर परिवार, समाज, राष्ट्र एवम् विश्व को घोर अज्ञानता एवम् पतन के गर्त में गिरने से बचाना हो तो, हर एक विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालयों में, तथा जितने भी सुरक्षाबल हैं उनके सिपाही एवं सैनिकों के मध्य, व कारागारों में कैदियों के समक्ष, हर एक विभाग व जन-जन में गीता के विश्वव्यापी पठन-पाठन व प्रचार-प्रसार की आज महती आवश्यकता है । जो मैं निरन्तर अबाध गति से अनवरत 35 वर्षों से कर रहा हूँ ।

आप सभी से मेरा विनम्र निवेदन है की इस महानतम ईश्वरीय कार्य में आप सभी मेरा साथ दें ।

मुझे अत्यन्त प्रसन्नता है कि इन ऐसे गम्भीर विषयों पर समाज हित में सदैव तलस्पर्शी चिन्तन मनन करने वाले देशभक्त, सच्चे कर्मयोगी विद्वत्वर्य ग़ाज़ीपुर के पुलिस अधीक्षक महोदय Dr. अरविन्द चतुर्वेदी जी ने सहर्ष उत्साह पूर्वक अपने पुलिस विभाग ( पुलिस लाइन ग़ाज़ीपुर ) में नैतिकता के उपर गीता प्रवचन का बहुत ही दिव्य आयोजन किया, अत्यन्त व्यस्त होते हुए भी पूरा समय दिया तथा गीता प्रवचन के पश्चात ओजस्वी वाणी मे दिया गया पांडित्य पूर्ण उनका भाषण सभी को मंत्रमुग्ध कर गया । प्रवचन के उपरान्त जवानों के द्वारा पुछे गये प्रश्न भी बहुत ही सुन्दर थे ।

पुलिस-अधीक्षक आत्मीय श्री अरविन्द चतुर्वेदी जी को तथा उनके सभी अधिकारी गणों को ग़ाज़ीपुर की पुलिस-प्रशासन व्यवस्था को तथा बहुत ही सुंदरतम ढंग से मंच संचालन करने के लिये, बोलने की विधा में अत्यन्त, दक्ष, कवि हृदय मेरे अत्यन्त आत्मीय श्री अमर नाथ तिवारी जी को सहृदय पूर्वक कोटिशः साधुवाद एवं आशीर्वाद । जय सियाराम